इस बार ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ के लिए ऑस्कर पुरस्कार जोआकिम ट्रायर निर्देशित ‘सेंटिमेंटल वैल्यू’ को मिला. यह पहली नॉर्वेजियन फिल्म है जिसे यह सम्मान मिला है. भारत की तरफ से नीरज घेवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ की भी दावेदारी थी, पर अंतिम नामांकन में फिल्म जगह नहीं बना पाई.
बहरहाल, ट्रायर की फिल्म स्थानीय होते हुए अपनी अपील में वैश्विक है. असल में, पिता-पुत्री के संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती यह फिल्म घर, परिवार, रिश्ते, अहं और अकेलेपन को टटोलती है. नोरा (रेनेट रेंसवे) और अग्नेस (इंगा लिलिआस) दो बहनें है जिनके अपने पिता गुस्ताव (स्टेलन स्कार्सगार्ड) के साथ संबंध मधुर नहीं रहे. अपनी पत्नी से तलाक के बाद गुस्ताव, जो कि एक सफल फिल्मकार हैं, नार्वे छोड़ कर स्वीडन में रहने लगे, पर पत्नी की मौत के बाद उनका साक्षात्कार अपनी बेटियों से होता है. नोरा एक सफल थिएटर कलाकार है. जहाँ अग्नेस का अपना परिवार है वहीं नोरा अंतर्मन के द्वंदों से लड़ती अकेली रहती है. गुस्ताव लंबे समय के अंतराल के बाद एक पटकथा पर काम कर रहे हैं जो आत्मकथात्मक है और नोरा को ध्यान में रख कर ही उन्होंने लिखा है. वे चाहते हैं कि नोरा इस फिल्म में काम करे पर नोरा यह कहते हुए इंकार कर देती है ‘हमारे बीच संवाद ही कहां हैं’!
फिल्म नोरा के अंतर्मन पर पिता की अनुपस्थिति और भावात्मक विलगाव के प्रभावों को संवेदनशीलता से उकेरती है. जहां अग्नेस अपेन पिता के प्रति सहृदय है, वहीं नोरा निर्मम. यहां संवाद से ज्यादा संवादहीनता है. गुस्ताव नशे में फोन पर नोरा से कहते हैं: ‘मैं संवेदनशील हूँ, जो कि तुम भी हो और इन अर्थों में हम समान हैं.’ गुस्ताव उसी पुश्तैनी घर में फिल्म को शूट करना चाहते हैं, जिसे वो छोड़ चुके हैं. घर का बिंब फिल्म में बार-बार, विभिन्न दृश्यों में अगल तरीके से आता है.
एक भावनात्मक लगाव किरदारों का इस घर से है. सारा ड्रामा घर के इर्द-गिर्द ही घटता है. जहाँ निर्देशक काव्यात्मक दृश्यों को रचता है, वही अभिनय से कलाकार सफेद और स्याह के बीच के स्पेस को जीवन के रंग से भरता है. और जहाँ कहीं खाली स्पेस बचा रहता है, उसके लिए निर्देशक ने बैंकग्राउंड संगीत का कुशलता से इस्तेमाल किया है.
मशहूर फ्रेंच फिल्म निर्दशक रॉबर्ट ब्रेसां ने एक जगह नोट किया है: ‘बिंब और ध्वनियाँ उन लोगों की तरह होती हैं जो यात्रा में एक-दूसरे से परिचित होते हैं और बाद में अलग नहीं हो पाते.’ इस फिल्म की यात्रा में दो बहनों के बहिनापे, एक संवेदनशील पिता और पुत्री की ‘कलात्मक स्वतंत्रता’, अहं, बचपने में मनोमस्तिष्क पर पड़े प्रभावों को बिना वाचाल हुए कैमरा सहजता से बिंबों (फ्लेशबैक) और ध्वनियों के सहारे सामने लाता है. आखिर में, नोरा अपने पिता की फिल्म में काम करती है और दोनों की आपसी दूरियाँ सिमट आती है.
ट्रायर की फिल्म ‘द वर्स्ट पर्सन न द वर्ल्ड’ में रेनेट रेंसवे की अदाकारी को सबने सराहा था. एक बार फिर से इस फिल्म में अपनी प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने लोगों ध्यान खींचा है. साथ ही स्टेलन स्कार्सगार्ड का अभिनय भी उत्कृष्ट है.

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