जेएनयू छात्रसंघ में पहली बार आइसा चारों पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव) पर विजयी रही. पहली बार जेएनयू के इतिहास में एसएफआई -एआईएसएफ का सफ़ाया हुआ. ज़ाहिर है नंदीग्राम, सिंगुर का मुद्दा चुनाव में हावी रहा. आरक्षण के मुद्दे ने भी अपना रंग दिखाया, दो पदों पर 'यूथ फॉर इक्वलिटी' के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे.
पारंपरिक 'प्रेसिडेंसिल डिबेट' की रात 'राम के नाम' पर घमासान हुआ.पहली बार डिबेट पूरी नहीं हो पाई. जबकि ऐसा लग रहा था कि चुनाव स्थगित हो सकता है जेएनयू की जनता ने भारी मतों से चुनाव को सफल बनाया. लोकतंत्र फिर जीता.